बिहार के मखाने की ऑस्ट्रेलिया तक पहुंच: पहली बार समुद्री रास्ते से भेजी गई 18 टन की खेप
पटना, 08 अगस्त । बिहार के जीआई टैग प्राप्त मिथिला मखाने ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। पहली बार 18 मीट्रिक टन मखाने की खेप समुद्री रास्ते से ऑस्ट्रेलिया भेजी गई है। दरभंगा के किसानों से सीधे खरीदा गया मखाना बिहटा के बियाडा औद्योगिक क्षेत्र में पैक किया गया।
खेप को कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस निर्यात के साथ बिहार के मखाने के लिए विदेशी बाजार में विस्तार की नई संभावनाएं खुली हैं। खास बात यह है कि किसानों को स्थानीय बाजार की तुलना में करीब 18 प्रतिशत अधिक कीमत मिली।
दरभंगा के किसानों से सीधी खरीद, बिहटा में हुई पैकिंग
ऑस्ट्रेलिया भेजी गई खेप में उच्च गुणवत्ता वाला जीआई टैग प्राप्त मिथिला मखाना शामिल है। मखाने की खरीद दरभंगा जिले के उत्पादक किसानों से सीधे की गई।
इसके बाद मखाने को बिहटा स्थित बियाडा औद्योगिक क्षेत्र में पैक किया गया। निर्यात की जिम्मेदारी एनआइएडी ग्रीन ने संभाली, जबकि लॉजिस्टिक्स का काम जितबान सप्लाई चेन प्राइवेट लिमिटेड ने किया।
इस पूरी प्रक्रिया से खेत से लेकर विदेशी बाजार तक मखाने की एक नई सप्लाई चेन सामने आई है।
पहली समुद्री खेप से किसानों को बेहतर बाजार की उम्मीद
ऑस्ट्रेलिया भेजी गई यह पहली समुद्री खेप बिहार के मखाना उद्योग के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे उत्पादकों को सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ने का मौका मिलेगा।
सबसे बड़ा फायदा किसानों को मिला है। उन्हें स्थानीय बाजार भाव से करीब 18 प्रतिशत अधिक कीमत प्राप्त हुई। इससे अंतरराष्ट्रीय मांग बढ़ने पर मखाना उत्पादकों की आय में बढ़ोतरी की संभावना है।
सरकार और निर्यात से जुड़े संस्थान अब मखाने की गुणवत्ता बनाए रखने और नए विदेशी बाजार तलाशने पर जोर दे रहे हैं।
देश के कुल मखाना उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी 85%
मखाना उत्पादन में बिहार देश का सबसे बड़ा केंद्र है। देश के कुल मखाना उत्पादन में बिहार की हिस्सेदारी करीब 85 प्रतिशत बताई जाती है।
मिथिला क्षेत्र के मखाने को उसकी विशिष्ट पहचान के चलते जीआई टैग भी मिल चुका है। अब इसकी मांग भारत के घरेलू बाजार से आगे बढ़कर अमेरिका, मध्य-पूर्व, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया तक पहुंच रही है।
2025-26 में 7 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा मखाना निर्यात
वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत ने 7,000 मीट्रिक टन से अधिक मखाना और उससे बने उत्पादों का निर्यात किया। इन उत्पादों की पहुंच 20 से अधिक देशों तक रही।
ऑस्ट्रेलिया को समुद्री रास्ते से भेजी गई 18 टन की पहली खेप को इसी बढ़ते वैश्विक बाजार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे बिहार के मखाना किसानों को आने वाले समय में नए बाजार और बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद बढ़ी है।

