मुख्य चुनाव आयुक्त को बर्खास्त करके भेजना चाहिए जेल: अशोक गहलोत
जयपुर, 23 सितंबर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दो चुनाव आयुक्तों द्वारा आयोग के फैसलों पर आपत्ति जताये जाने को देश के लोकतंत्र के लिए बेहद गंभीर स्थिति बताते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल बर्खास्त कर जेल भेजने की मांग की है।
श्री गहलोत ने बुधवार को यहां अपने आवास पर मीडिया से बातचीत में यह मांग की। उन्होंने कहा कि श्री ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर जो संदेह पूरे देश को पहले से था, उसे अब आयोग के अपने ही सदस्यों ने उजागर कर दिया है। पश्चिम बंगाल और बिहार में जो कुछ हुआ और जिस तानाशाही तरीके से आयोग चलाया गया, उसे कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार उठाते आ रहे थे। आज वही बात सच साबित हुई है।
उन्होंने कहा कि कोविड-19 हो, एसआईआर हो, वोट चोरी हो या चुनाव आयोग, श्री गांधी ने हर मुद्दे पर संसद के भीतर और बाहर दो टूक बात की है और लोगों को विश्वास हो गया है कि वह सच बोलते हैं।
श्री गहलोत ने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पूरी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के लिए बहुत बड़े शर्म की बात है कि उन्होंने ऐसे व्यक्ति का चयन किया। उच्चत्तम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को चयन समिति से बाहर करने के लिए नया कानून लाना ही बताता है कि इनकी मंशा पहले से क्या थी। उन्होंने कहा, निष्पक्ष चुनाव समाप्त हो गये हैं, लोगों का विश्वास उठ गया है। लोग बैलेट पेपर से चुनाव की मांग कर रहे हैं, पर ये सुनना ही पसंद नहीं करते। उन्होंने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), आयकर और केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) तो पहले से दबाव में थे, अब चुनाव आयोग भी इनका एक विभाग बनकर रह गया है।
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को तत्काल बर्खास्त करने की मांग करते हुए कहा, इनको जेल की सलाखों के पीछे बंद करने की नौबत होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सवाल यह है कि कार्रवाई करेगा कौन, जब कार्रवाई करने वाले ही इसमें मिले हुए हैं। उन्होंने चेताया कि परिसीमन के जरिए संसद और विधानसभाओं की सीटें अपने हिसाब से तय करने और चीन, रूस और उत्तर कोरिया की तरह एक पार्टी के स्थायी शासन की तैयारी चल रही है। पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां विपक्ष के विधायकों और सांसदों को तोड़कर पक्ष और विपक्ष दोनों पर कब्जा कर लिया गया है।
राजस्थान के नगर निकाय चुनावों पर श्री गहलोत ने कहा कि असम की तर्ज पर यहां भी एकतरफा परिसीमन किया गया। भाजपा को जो सूट किया, उसी हिसाब से कहीं चार-चार वार्डों को एक कर दिया गया तो कहीं एक वार्ड को दो में बांट दिया गया। इसी के दम पर ये चुनाव जीते हैं, जबकि जयपुर, जोधपुर समेत कई जगह वोटों की संख्या में कांग्रेस आगे है और कुल वोटों में केवल 0.94 प्रतिशत पीछे है।
निर्दलीय विधायक के लापता होने और पार्षदों को हरियाणा ले जाये जाने से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि राजस्थान के इतिहास में चुनाव में पहली बार ऐसी हरकतें हुई हैं। खरीद फरोख्त , पैसे बांटना, पार्षदों को उठाना, उनके परिवारों को धमकाना, मकान तोड़ने के नोटिस देना और दस-बीस साल पुराने केस खोलना, ऐसा कोई हथकंडा नहीं जो नहीं अपनाया गया। हरियाणा और उत्तर प्रदेश की पुलिस तक का इस्तेमाल किया गया।
उन्होंने कहा कि जिन अधिकारियों ने सरकार के दबाव में यह सब किया, उन्होंने आईएएस और आईपीएस कैडर को कलंकित किया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, मैं उन्हें भला आदमी समझता था, पर मैं सोच नहीं सकता था कि वे इस तरह के चुनाव करवाकर राजस्थान को बर्बाद कर देंगे। ऐसी जीत पर गर्व करना शर्मनाक है।
श्री गहलोत ने कहा कि हालात ऐसे हैं कि अब तक तो राजस्थान बंद हो जाना चाहिए था। व्यापारी वर्ग समेत सभी वर्गों और इंडिया गठबंधन से जुड़े सभी विपक्षी दलों को मिलकर राजस्थान बंद का आह्वान करना चाहिए। जोधपुर, जयपुर और कोटा को लेकर उन्होंने कहा कि 25 तारीख का इंतजार कीजिए।

