राजस्थान

डिजिटल अरेस्ट से बचाएगा सीबीआई का ‘अभय’: राजस्थान पुलिस ने जारी की नए एआई चैटबॉट को लेकर विशेष एडवाइजरी

जयपुर 29 मई। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा द्वारा प्रदेश में साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने और आम नागरिकों को नए जमाने के हाइटेक खतरों से सुरक्षित रखने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम श्री वीके सिंह ने बताया कि इन दिनों तेजी से बढ़ रहे डिजिटल अरेस्ट स्कैम और अदालतों व जांच एजेंसियों के नाम पर भेजे जा रहे फर्जी अरेस्ट वारंट से नागरिकों को बचाने के लिए एक विशेष एडवाइजरी जारी की गई है। इस बढ़ते खतरे से निपटने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा ‘अभय’ (ABHAY) नामक एक अत्यंत आधुनिक एआई आधारित नोटिस सत्यापन चैटबॉट विकसित किया गया है, जो किसी भी संदिग्ध नोटिस की असलियत बताने में सक्षम है।

क्या है अभय चैटबॉट और कैसे करता है डिजिटल सुरक्षा गार्ड का काम-

एडीजी श्री सिंह ने बताया कि ABHAY (Artificial Intelligence Based Helpful Assistant for You) एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस संचालित चैटबॉट है, जो इंटरनेट पर सक्रिय अपराधियों के खिलाफ आम नागरिकों के लिए एक डिजिटल सुरक्षा गार्ड की तरह काम करता है। यह चैटबॉट चौबीसों घंटे (24×7) लाइव रहता है, जो किसी भी व्यक्ति को मिले संदिग्ध सीबीआई या अन्य सरकारी नोटिस की वास्तविकता की तुरंत जांच करके असली और नकली नोटिस के बीच का अंतर स्पष्ट कर देता है। इसका मुख्य उद्देश्य डिजिटल अरेस्ट जैसे बड़े फ्रॉड के दौरान नागरिकों को घबराहट में कोई भी गलत या आत्मघाती कदम उठाने से रोकना है।

अभय चैटबॉट की चार सबसे बड़ी तकनीकी विशेषताएं—

साइबर शाखा के अनुसार यह एआई चैटबॉट बेहद एडवांस फीचर्स से लैस है, जो संकट के समय पीड़ितों के लिए मददगार साबित होता है:

1. रीयल-टाइम अपडेट: देश में जैसे ही साइबर अपराधी ठगी का कोई नया तरीका निकालते हैं, पुलिस और जांच एजेंसियां इसके बैकएंड डेटाबेस को तुरंत अपडेट कर देती हैं, जिससे यह चैटबॉट नए फ्रॉड को भी पहचान लेता है।

2. नो-पैनिक गाइडेंस : चैटबॉट को इस तरह प्रशिक्षित (ट्रेन) किया गया है कि यदि कोई डरा हुआ पीड़ित इससे बात करता है, तो यह उसे शांत रखकर स्टेप-बाय-स्टेप विधिक निर्देश देता है।

3. ऑटो-रूटिंग की सुविधा: यदि मामला अत्यधिक गंभीर श्रेणी का होता है, तो यह यूजर को सीधे भारत सरकार के आधिकारिक शिकायत पोर्टल के लिंक पर रीडायरेक्ट कर देता है।

4. बिना थके 24×7 सेवा: एक स्वचालित एआई सिस्टम होने के कारण यह आधी रात को भी ठगी का शिकार होने वाले व्यक्ति को उतनी ही त्वरित गति से विधिक सुरक्षात्मक जवाब देता है।

ग्रामीणों, महिलाओं और बुजुर्गों को सरल भाषा में मिलेगी तत्काल सहायता-

श्री सिंह ने बताया कि इस चैटबॉट को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि साइबर धोखाधड़ी होने के शुरुआती महत्वपूर्ण समय में यह पीड़ित को तुरंत बैंक खाता फ्रीज कराने या शिकायत दर्ज कराने जैसे सटीक कदम उठाने की सलाह देता है। यह सिस्टम हिंदी, अंग्रेजी के साथ-साथ स्थानीय क्षेत्रीय भाषाओं को समझने में पूरी तरह सक्षम है, जिससे ग्रामीण और कम तकनीकी समझ रखने वाले बुजुर्ग व महिलाएं भी डिजिटल अरेस्ट, सेक्सटॉर्शन और फर्जी लोन ऐप जैसे हाइटेक स्कैम्स के बारे में अपनी भाषा में आसानी से सीख और समझ सकते हैं।

सतर्क रहें, सुरक्षित रहें: सीधे इन नंबरों पर करें शिकायत—

राजस्थान पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी अनजान नंबर से आने वाले कोर्ट या पुलिस के नोटिस से डरने की बजाय अभय के साथ उसका सत्यापन करें। यदि आपके साथ किसी भी प्रकार की साइबर ठगी की घटना हो जाती है या ठगों द्वारा ऐसी कोशिश की जाती है, तो बिना डरे इसकी सूचना निकटतम पुलिस स्टेशन, साइबर पुलिस स्टेशन, राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल https://cybercrime.gov.in, साइबर हेल्पलाइन नम्बर 1930 अथवा साइबर हेल्पडेस्क नम्बर 9256001930 / 9257510100 पर दें।

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