गुप्त नवरात्र कल से शुरू, आठ दिन चलेगी देवी आराधना, दुर्लभ शुभ योगों में होगी साधना
तिथि क्षय के कारण इस बार 17 जुलाई को तृतीया-चतुर्थी का संयुक्त पूजन, 22 जुलाई को भड़ल्या नवमी पर होगा समापन
14 जुलाई, जयपुर । आषाढ़ मास के गुप्त नवरात्र इस वर्ष बुधवार 15 जुलाई से प्रारंभ हो रहे हैं। तिथि क्षय के कारण इस बार गुप्त नवरात्र सामान्य नौ दिनों के बजाय आठ दिनों तक ही रहेंगे। 22 जुलाई को भड़ल्या नवमी के दिन हवन, पूर्णाहुति और कलश विसर्जन के साथ नवरात्र का समापन होगा। आचार्य अवधेश दाधीच ने बताया कि 15 जुलाई गुरुवार को सूर्योदय के समय प्रतिपदा तिथि विद्यमान रहने से इसी दिन विधि-विधान के साथ कलश स्थापना कर मां दुर्गा की आराधना प्रारंभ की जाएगी। 17 जुलाई को तृतीया तिथि के क्षय होने के कारण तृतीया एवं चतुर्थी का संयुक्त पूजन किया जाएगा, जिससे नवरात्र की अवधि आठ दिन की रहेगी।
दुर्लभ शुभ योगों में साधना का विशेष महत्व: आचार्य दाधीच ने बताया कि इस वर्ष गुप्त नवरात्र की शुरुआत कई दुर्लभ और शुभ योगों में हो रही है। रवि योग, प्रीति योग, ब्रह्म योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग तथा पुष्य नक्षत्र जैसे शुभ संयोग साधना, मंत्र-जप, यंत्र-पूजन, हवन एवं देवी उपासना के लिए अत्यंत फलदायी माने गए हैं। इन योगों में श्रद्धा एवं नियमपूर्वक की गई साधना से मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति, सकारात्मक ऊर्जा तथा कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।
दस महाविद्याओं की साधना, मंदिरों में होंगे विशेष आयोजन: आचार्य अवधेश दाधीच ने बताया कि गुप्त नवरात्र विशेष रूप से तंत्र साधना एवं दस महाविद्याओं की उपासना के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इस दौरान मां काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी तथा कमला देवी की साधना का विशेष महत्व है। साधक इन दिनों गुरु के मार्गदर्शन में गोपनीय रूप से मंत्र सिद्धि एवं आध्यात्मिक अनुष्ठान करते हैं। गुप्त नवरात्र के अवसर पर बरवाड़ा कस्बे सहित जिले के विभिन्न शक्ति पीठों और देवी मंदिरों में कलश स्थापना, दुर्गा सप्तशती पाठ, नवचंडी यज्ञ, अखंड ज्योत, देवी अभिषेक, हवन, महाआरती एवं भजन-कीर्तन जैसे धार्मिक आयोजन होंगे। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां भगवती के दर्शन कर विशेष पूजा-अर्चना करेंगे।
गुप्त नवरात्र व्यक्तिगत साधना का केंद्र: उन्होंने बताया कि शारदीय एवं चैत्र नवरात्र की तुलना में गुप्त नवरात्र में सार्वजनिक आयोजनों की अपेक्षा व्यक्तिगत साधना, मौन जप, ध्यान, उपवास तथा तांत्रिक अनुष्ठानों को अधिक महत्व दिया जाता है। इस वर्ष दुर्लभ शुभ संयोगों के कारण गुप्त नवरात्र का धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया है। 22 जुलाई को भड़ल्या नवमी के दिन गुप्त नवरात्र का समापन होगा। पंचांग के अनुसार यह दिन विवाह, गृह प्रवेश, वाहन क्रय, व्यापार आरंभ, प्रतिष्ठान उद्घाटन एवं अन्य मांगलिक कार्यों के लिए भी अत्यंत शुभ माना गया है।

