आषाढ़ कृष्ण चतुर्थी पर चौथ माता धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब
हजारों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, अच्छी बारिश, समृद्ध खरीफ फसल और परिवार की खुशहाली की मांगी मनौती
चौथ का बरवाड़ा, 03 जुलाई। आषाढ़ कृष्ण चतुर्थी के अवसर पर शुक्रवार को चौथ माता मंदिर में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। मंगल आरती से लेकर शयन आरती तक जयकारों से मुख्य मंदिर परिसर गूंजता रहा। श्रद्धालुओं ने चौथ माता के दर्शन कर घर-परिवार की सुख-समृद्धि, क्षेत्र में अच्छी वर्षा तथा खरीफ फसल की भरपूर पैदावार की कामना की। मंदिर ट्रस्ट की ओर से दर्शनार्थियों के लिए छाया और शीतल पेयजल की समुचित व्यवस्था की गई, जिससे श्रद्धालुओं को राहत मिली।
आकर्षक फूल बंगला झांकी बनी आकर्षण: मंदिर में दर्शन व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए महिला एवं पुरुष श्रद्धालुओं की अलग-अलग कतारें लगाई गईं। गर्भगृह सहित मुख्य मंदिर परिसर को आकर्षक फूल बंगला झांकी से सजाया गया, जिसने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं ने माता के जयकारे लगाए और विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर मनोकामनाएं मांगी।
किसानों ने अच्छी बारिश और समृद्ध फसल की मांगी मनोकामना: आषाढ़ मास की कृष्ण चतुर्थी का किसान वर्ग में विशेष महत्व माना जाता है। इसी परंपरा के तहत आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में किसान परिवार ढोक लगाकर चौथ माता के दरबार पहुंचे। श्रद्धालुओं ने क्षेत्र में समय पर अच्छी बारिश, खरीफ फसल की बेहतर पैदावार और खुशहाली की प्रार्थना की। हजारों किसान इसी आस्था के साथ मंदिर पहुंचे।
रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर रही भीड़: श्रद्धालु कस्बे को जोड़ने वाले सभी मार्गों से पैदल, कनक दंडवत, निजी वाहनों, रेल तथा बसों के माध्यम से चौथ माता धाम पहुंचे। रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर दिनभर यात्रियों की भारी भीड़ रही। वहीं रेलवे क्रॉसिंग पर ट्रेन गुजरने के दौरान कुछ समय के लिए जाम की स्थिति भी बनी, जिससे आवागमन प्रभावित हुआ। इसके बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह पूरे दिन देखने को मिला।
रात्रि 9:53 बजे चंद्रोदय पर खोला व्रत: आषाढ़ कृष्ण चतुर्थी का उपवास रखने वाले श्रद्धालुओं ने रात्रि 9:53 बजे चंद्रोदय होने पर चंद्रमा को विधिवत अर्घ्य अर्पित किया। इसके बाद चौथ माता का स्मरण कर परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की दीर्घायु एवं क्षेत्र की खुशहाली की कामना करते हुए श्रद्धापूर्वक अपना उपवास खोला। श्रद्धालुओं ने धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए पूरे उत्साह और आस्था के साथ व्रत का समापन किया।

