राजस्थान

विश्वविद्यालय शोध एवं नवाचार से सामाजिक परिवर्तन के बनें केंद्र : वी. श्रीनिवासन 

जयपुर, 24 जून। मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवासन ने बुधवार को शासन सचिवालय में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा राज्य में संचालित विभिन्न नवाचारों, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन तथा राष्ट्रीय एक्शन प्लान के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की। बैठक में विश्वविद्यालयों के उल्लेखनीय कार्यों, चुनौतियों, रोजगारपरक शिक्षा, शोध एवं नवाचार, डिजिटल गवर्नेंस तथा उद्योग-अकादमिक सहभागिता से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।

उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों को विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों एवं वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप तैयार करना चाहिए। बैठक में नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल तथा मुख्य सचिवों के राष्ट्रीय सम्मेलन में निर्धारित राष्ट्रीय एक्शन प्लान के विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा की गई। 

मुख्य सचिव ने कहा कि राज्य में उच्च शिक्षा क्षेत्र में किए जा रहे नवाचार राष्ट्रीय स्तर पर सराहे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आउट ऑफ क्लासरूम लर्निंग को भी अकादमिक क्रेडिट से जोड़ा जाए तथा खेल, एनसीसी, एनएसएस, सामुदायिक सेवा, फील्ड प्रोजेक्ट, इंडस्ट्रियल विजिट एवं इंटर्नशिप जैसी गतिविधियों को क्रेडिटाइज करने की दिशा में प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। 

उन्होंने कहा कि अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम, इंटर्नशिप आधारित शिक्षण तथा उद्योग आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यह आधुनिक शिक्षा प्रणाली का महत्वपूर्ण आधार है।

उन्होंने विश्वविद्यालयों को उद्योगों, शोध संस्थानों एवं प्रतिष्ठित संगठनों के साथ अधिकाधिक एमओयू करने तथा पाठ्यक्रम निर्माण में उद्योगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से प्रशासनिक दक्षता, पारदर्शिता तथा विद्यार्थियों को सेवाओं की सुगम उपलब्धता सुनिश्चित की जा सकती है। उन्होंने शोधगंगा, एंटी-प्लेगरिज्म सिस्टम, वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन तथा अन्य डिजिटल शोध संसाधनों के अधिकतम उपयोग पर भी निर्देश दिए। 

मुख्य सचिव ने कहा कि विश्वविद्यालयों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, ड्रोन टेक्नोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी, नवीकरणीय ऊर्जा, जनरेटिव एआई, प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग तथा अन्य उभरते क्षेत्रों से जुड़े पाठ्यक्रम प्रारम्भ करने चाहिए। 

उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षा का समन्वय विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए आवश्यक है। मुख्य सचिव ने विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस योजना को व्यापक रूप से लागू करने पर जोर देते हुए कहा कि उद्योग, विज्ञान, तकनीक, उद्यमिता, वित्त एवं प्रबंधन जैसे क्षेत्रों के अनुभवी विशेषज्ञों को विद्यार्थियों से जोड़ा जाए।

उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक विश्वविद्यालय वर्ष 2047 को लक्ष्य मानकर अपना दीर्घकालिक विजन डॉक्यूमेंट तैयार करे। इसके लिए चिंतन शिविर, संगोष्ठियां, कार्यशालाएं एवं अध्ययन समूह गठित किए जाएं।

उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री कुलदीप रांका ने राज्य में संचालित विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षा क्षेत्र में हो रहे नवाचारों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राजस्थान देश में सर्वाधिक विश्वविद्यालयों वाले राज्यों में अग्रणी है। 

उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत सेमेस्टर प्रणाली, चॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम,मल्टीडिसिप्लिनरी कोर्सेज, भारतीय ज्ञान प्रणाली, इंटर्नशिप आधारित शिक्षण, अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम, फिनिशिंग स्कूल, विदेशी भाषा कौशल कार्यक्रम, उद्योग-अकादमिक समन्वय, डिजिटल गवर्नेंस एवं वैश्विक सहयोग जैसी पहलों की प्रगति से अवगत कराया। 

बैठक में विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने अपने-अपने संस्थानों में संचालित नवाचारों, उपलब्धियों एवं चुनौतियों की जानकारी दी। 

इस अवसर पर उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, संबंधित विभागीय अधिकारी एवं हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति श्री मुकेश शर्मा सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति वीसी के माध्यम से उपस्थित रहे।

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