रणथंभौर में बाघिन शक्ति के शावक ने किया सांभर का शिकार, पर्यटकों के सामने दिखी जंगल की अनोखी पाठशाला
सवाई माधोपुर, 20 जून l रणथंभौर टाइगर रिजर्व में शुक्रवार शाम पर्यटकों को जंगल का एक दुर्लभ और रोमांचक दृश्य देखने को मिला। प्रसिद्ध बाघिन शक्ति (टी-111) के एक शावक ने सांभर हिरण का सफल शिकार किया। इस दौरान बाघिन शक्ति और उसके दोनों शावक एक साथ नजर आए। शिकार के बाद तीनों लंबे समय तक उसी क्षेत्र में मौजूद रहे, जिससे पर्यटकों को वन्यजीवन का अद्भुत नजारा देखने का अवसर मिला।
जानकारी के अनुसार रणथंभौर टाइगर रिजर्व के जोन संख्या 4 और 5 में शाम की सफारी के दौरान पर्यटकों ने बाघिन शक्ति और उसके दोनों शावकों को देखा। इसी दौरान एक शावक ने सांभर हिरण का शिकार किया। सांभर जैसे बड़े और ताकतवर शिकार को पकड़ना युवा शावकों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है। इस दृश्य ने पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों को रोमांचित कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार शिकार के बाद बाघिन शक्ति और दोनों शावक बारी-बारी से शिकार खाते रहे। कुछ समय बाद दोनों शावक आपस में खेलते और अठखेलियां करते भी दिखाई दिए। पूरा घटनाक्रम पर्यटकों ने अपने कैमरों में कैद कर लिया, जिसके वीडियो और तस्वीरें अब चर्चा का विषय बने हुए हैं।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यह दृश्य शावकों के प्रशिक्षण का हिस्सा है। लगभग एक वर्ष आयु के दोनों शावकों को बाघिन शक्ति जंगल में शिकार करने और स्वतंत्र रूप से जीवित रहने के गुर सिखा रही है। बाघिन अपने बच्चों को पहले शिकार तक ले जाती है, फिर उन्हें शिकार की तकनीक, क्षेत्र की पहचान और जंगल में जीवित रहने के तरीके सिखाती है। इस तरह के अनुभव भविष्य में शावकों को आत्मनिर्भर शिकारी बनने में मदद करते हैं।
वन्यजीव प्रेमियों के अनुसार सांभर हिरण बाघों के लिए महत्वपूर्ण शिकार प्रजातियों में शामिल है। आकार और ताकत के कारण इसे पकड़ना आसान नहीं माना जाता। ऐसे में किसी युवा शावक द्वारा सांभर का सफल शिकार किया जाना उसकी बढ़ती क्षमता और प्रशिक्षण की सफलता को दर्शाता है। यही कारण है कि यह दृश्य सफारी पर आए पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन गया।
बाघिन शक्ति रणथंभौर की चर्चित बाघिनों में गिनी जाती है। उसका संबंध रणथंभौर की प्रसिद्ध बाघिन ‘मछली’ के वंश से बताया जाता है। शक्ति, बाघिन टी-19 कृष्णा की बेटी है और वर्तमान में उसकी टेरिटरी मुख्य रूप से रणथंभौर के जोन 4 और 5 में फैली हुई है। वन्यजीव प्रेमियों के बीच शक्ति को एक सक्षम और आक्रामक शिकारी के रूप में जाना जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मां के गुण और शिकार की तकनीक शावकों के व्यवहार में भी दिखाई देती है। वर्तमान में दोनों शावक तेजी से बड़े हो रहे हैं और जंगल में स्वतंत्र जीवन के लिए आवश्यक कौशल सीख रहे हैं। ऐसे दृश्य न केवल वन्यजीव संरक्षण की सफलता को दर्शाते हैं, बल्कि पर्यटकों को प्राकृतिक जीवन चक्र को नजदीक से समझने का अवसर भी प्रदान करते हैं।
रणथंभौर टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती संख्या और सफल प्रजनन वन संरक्षण के लिए सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं। बाघिन शक्ति और उसके शावकों की यह साइटिंग भी वन्यजीव प्रेमियों के लिए यादगार अनुभव बन गई।

