राजस्थान

हनुमान बेनीवाल के नेतृत्व में युवाओं की जीत: एसआई भर्ती 2021 रद्द, री-एग्जाम के फैसले से फिर गरमाई 3 लाख अभ्यर्थियों की मांग

जयपुर,9 मई। लंबे समय से चल रहे विवाद और युवाओं के आंदोलन के बीच आखिरकार बड़ा फैसला सामने आया है। आरपीएससी की एसआई भर्ती परीक्षा 2021 को रद्द करते हुए सरकार ने इसके पुनः परीक्षा (री-एग्जाम) कराने का निर्णय लिया है। यह भर्ती कुल 859 पदों के लिए आयोजित की गई थी। यह फैसला लगातार उठ रही आवाज़ों, सड़क से लेकर सदन तक हुए आंदोलनों, ज्ञापनों और कानूनी हस्तक्षेप के बाद आया है। इस पूरे मामले में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने लगातार युवाओं के पक्ष में आंदोलन चलाया और इसे “युवाओं की न्याय की लड़ाई” बताया। पार्टी प्रमुख हनुमान बेनीवाल का कहना है कि जब भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोप सामने आए, तब प्रदेश के हजारों युवा लगातार विरोध प्रदर्शन करते रहे। मामला अंततः माननीय उच्च न्यायालय और माननीय सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जिसके बाद सरकार और आयोग को परीक्षा रद्द कर पुनः परीक्षा का निर्णय लेना पड़ा।

3 लाख से अधिक अभ्यर्थियों को लेकर विवाद : री-एग्जाम को लेकर अब नया विवाद भी खड़ा हो गया है। सरकार के निर्णय के अनुसार केवल उन्हीं 3,83,097 अभ्यर्थियों को परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिलेगा, जो पहले परीक्षा में उपस्थित हुए थे। जबकि करीब 8 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। ऐसे में 3 लाख से अधिक ऐसे अभ्यर्थी, जो आवेदन करने के बावजूद परीक्षा में शामिल नहीं हो सके थे, उन्हें बाहर किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। आरएलपी और कई छात्र संगठनों का कहना है कि यह निर्णय अन्यायपूर्ण है और सभी आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को पुनः परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया जाना चाहिए। इसके लिए वे उदाहरण देते हैं कि पहले भी कुछ राज्यों और परीक्षाओं में रद्द हुई भर्तियों के बाद सभी आवेदनकर्ताओं को दोबारा मौका दिया गया था।

युवाओं की जीत या नई लड़ाई? जहां एक ओर इस फैसले को युवाओं की जीत और लंबे संघर्ष का परिणाम बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर नई मांगों ने सरकार के लिए चुनौती खड़ी कर दी है। आरएलपी ने दोहराया है कि वह हर मेहनतकश युवा के साथ खड़ी थी, है और आगे भी रहेगी। वहीं युवाओं में अब यह बहस तेज हो गई है कि क्या री-एग्जाम का दायरा सभी आवेदनकर्ताओं तक बढ़ाया जाएगा या नहीं। पूरा मामला अब एक बार फिर प्रशासनिक और राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है।

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