साइबर अपराधों के खिलाफ अंकुश में डिजिटल साक्ष्यों पर जोर देना होगा :केन्द्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुनराम
जयपुर, 9 मई। केन्द्रीय विधि एवं न्याय मंत्री श्री अर्जुनराम मेघवाल ने कहा कि तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ-साथ अपराध एवं अपराधियों का स्वरूप भी बदल रहा है। साइबर अपराध इसी तरह का उदाहरण है। ऐसे अपराधों पर प्रभावी रूप से अंकुश लगाने के लिए हमारी पुलिस, अभियोजन एवं न्याय व्यवस्था को अधिक सशक्त होना होगा। श्री मेघवाल शनिवार को बिरला ऑडिटोरियम में लोक अभियोजकों को साइबर क्राइम तथा दिव्यांगजनों से संबंधित प्रकरणों में अधिक संवेदनशील बनाने एवं नवीन अपराधिक विधियों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। विधिक एवं विधिक कार्य विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यशाला में उन्होंने साइबर अपराधों में लोक अभियोजन को और प्रभावी बनाने पर बल दिया। श्री मेघवाल ने कहा कि तकनीक पर आधारित अपराध कई मायनों में परम्परागत अपराधों से अलग है। ऐसे अपराधों के अनुसंधान एवं अभियोजन में तकनीकी साक्ष्यों पर जोर देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक काल की दंड सहिता को केंद्र सरकार ने भारतीय पृष्ठभूमि पर आधारित न्याय संहिता में बदलकर न्यायिक प्रक्रिया को सुलभ एवं सुगम बनाया है। इसी तरह हमें भारतीय संविधान की भावना के अनुरूप दिव्यांगजनों को आगे बढा़ने के लिए अधिक संवेदनशील नजरिए से देखने की आवश्यकता है। इस अवसर पर राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश श्री संजीव प्रकाश शर्मा ने कहा कि पीड़ित को त्वरित न्याय दिलाने की दिशा में लोक अभियोजकों को कानून के साथ-साथ तकनीक की जानकारी रखना भी आज के युग में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि लोक अभियोजक न्याय प्रणाली की रीढ़ की हड्डी है, जिनके माध्यम से पीड़ित को न्याय मिलना सुनिश्चित हो पाता है।
विधि एवं विधिक कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि भारत अब न्याय प्रणाली के एक नए युग में प्रवेश कर रहा है, जहां दंड के स्थान पर न्याय को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन में अंग्रेजों की मानसिकता वाले पुराने औपनिवेशिक कानूनों को समाप्त कर नए कानून लागू किए गए हैं। इन कानूनों के माध्यम से लोक अभियोजकों को अपने मुवक्किल का पक्ष मजबूती से रखते हुए उन्हें त्वरित न्याय दिलाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
उन्होंने कहा कि बढ़ते साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए आमजन को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करना आवश्यक है, जो आम आदमी के लिए सुरक्षा कवच का कार्य कर सकें। राज्य पुलिस इस चुनौती को गंभीरता से लेते हुए साइबर अपराधों पर नियंत्रण के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 से अब तक विभाग द्वारा 54 हजार से अधिक पत्रावलियों का निस्तारण किया जा चुका है। साथ ही 56 नए न्यायालय खोले गए हैं।
महाधिवक्ता श्री राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि संविधान केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा भी करता है। उन्होंने कहा कि लोक अभियोजक एक स्वतंत्र निकाय है, जिसे “मिनिस्टर ऑफ जस्टिस” का दर्जा प्राप्त है और जिसका दायित्व सत्य का अन्वेषण कर पीड़ित को न्याय दिलाना है। उन्होंने कहा कि कर्तव्य में चूक समाज को असुरक्षित बना सकती है। उन्होंने दिव्यांगजन के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाते हुए न्याय प्रक्रिया को और अधिक सुलभ एवं प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया।
पुलिस महानिदेशक श्री राजीव शर्मा ने कहा कि नए आपराधिक कानूनों का मुख्य उद्देश्य पीड़ित को त्वरित न्याय दिलाना है। इन नए प्रावधानों में अभियोजन निदेशालय की महत्वपूर्ण भूमिका है, जो पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करता है। उन्होंने पुलिस की जवाबदेही बढ़ाने के लिए डिजिटल एविडेंस पर विशेष फोकस किए जाने तथा न्यायपालिका के साथ बेहतर समन्वय एवं सहयोग स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया। विधि एवं विधिक कार्य विभाग के प्रमुख शासन सचिव श्री राघवेन्द्र काछवाल ने आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर विधि एवं विधिक कार्य विभाग का लोगो का विमोचन किया गया एवं विभाग की कार्यप्रणाली को दर्शाती लघु फिल्म का प्रस्तुतीकरण भी किया गया।
कार्यशाला में गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव भास्कर ए सावंत, उच्च न्यायालय के न्यायाधीशगण, लोक अभियोजक, अधिवक्ता उपस्थित रहे।

