राजस्थान

लोकसभा में बेनीवाल ने उठाया मेजबान राज्यों को मुफ्त बिजली देने का मुद्दा: केंद्र ने कहा- ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं

नागौर/नई दिल्ली, 5 अगस्त राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के सवाल पर केंद्र सरकार ने लोकसभा में स्पष्ट किया कि अंतर-राज्यीय सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं की मेजबानी करने वाले राज्यों को उत्पादित बिजली का 15 प्रतिशत या कोई अन्य हिस्सा मुफ्त देने का फिलहाल कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने अपने जवाब में बताया कि वर्तमान में केवल जलविद्युत नीति-2008 के तहत बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं में मेजबान राज्यों को 12 प्रतिशत मुफ्त बिजली तथा अतिरिक्त एक प्रतिशत बिजली स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (LADF) के लिए देने का प्रावधान है।

इस पर सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा कि राजस्थान सहित कई राज्य अपनी भूमि, प्राकृतिक संसाधनों और आधारभूत ढांचे के माध्यम से देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। राजस्थान सौर एवं पवन ऊर्जा उत्पादन में अग्रणी राज्य होने के बावजूद उसे उसकी भागीदारी के अनुरूप प्रत्यक्ष लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने मांग की कि जलविद्युत परियोजनाओं की तर्ज पर सौर एवं पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिए भी नीति बनाई जाए, ताकि मेजबान राज्यों को बिजली, राजस्व या अन्य उपयुक्त लाभ मिल सकें और स्थानीय विकास को बढ़ावा मिले।

नियम-377 के तहत भाखड़ा और पोंग बांध का मुद्दा भी उठाया

बुधवार को ही सांसद बेनीवाल ने लोकसभा में नियम-377 के तहत भाखड़ा और पोंग बांध को सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए उनके पूर्ण जलभराव स्तर तक भरने की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा कि वर्तमान सुरक्षा मानकों के कारण दोनों बांधों को उनकी अधिकतम क्षमता तक नहीं भरा जाता, जिससे बड़ी मात्रा में पानी बिना उपयोग के बह जाता है।

बेनीवाल ने केंद्र सरकार से भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) को दोनों बांधों के अधिकतम सुरक्षित जलभराव स्तर पर नए वैज्ञानिक एवं तकनीकी अध्ययन कराने, रियल टाइम डिसीजन सपोर्ट सिस्टम, उन्नत मौसम पूर्वानुमान, जलग्रहण क्षेत्र की वास्तविक समय निगरानी तथा आधुनिक जलाशय प्रबंधन प्रणाली लागू करने के निर्देश देने की मांग की।

उन्होंने कहा कि इससे सुरक्षा से समझौता किए बिना उपलब्ध जल का अधिकतम उपयोग संभव होगा और राजस्थान के श्रीगंगानगर, बीकानेर, चूरू, झुंझुनूं, सीकर, नागौर, जोधपुर और बाड़मेर क्षेत्रों को सिंचाई एवं पेयजल के लिए अतिरिक्त पानी मिल सकेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *