भारत

करवा चौथ पर इस बार गौरी योग का संयोग, गणेश जी के साथ माता पार्वती की होगी विशेष आराधना

जयपुर, 24 अक्टूबर। करवा चौथ का पर्व इस बार विशेष ज्योतिषीय संयोगों और धार्मिक मान्यताओं के बीच मनाया जाएगा। सुहागिन महिलाएं 29 अक्टूबर को अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना के साथ करवा चौथ का निर्जला व्रत रखेंगी। इस दिन गौरी योग और अन्य शुभ योगों के संयोग को पूजा-पाठ के लिए विशेष फलदायी माना जा रहा है। धार्मिक परंपरा के अनुसार महिलाएं भगवान गणेश के साथ माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करेंगी। शाम को चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य देने के बाद पति के हाथों जल ग्रहण करके व्रत का पारणा करेंगी। ज्योतिषाचार्य पंडित ताराचंद शास्त्री के अनुसार ज्योतिषीय मान्यताओं में करवा चौथ पर गौरी योग का संयोग पूजा-अर्चना के महत्व को बढ़ाने वाला माना जाता है। माता पार्वती को अखंड सौभाग्य, दांपत्य सुख और वैवाहिक जीवन की खुशहाली का प्रतीक माना गया है। वहीं भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और शुभ कार्यों का आरंभ करने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। ऐसे में इस दिन गणेशजी और माता पार्वती की आराधना कर महिलाएं अपने परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और सौहार्द की कामना करेंगी। मान्यता है कि श्रद्धा और भक्ति के साथ व्रत रखने तथा विधि-विधान से पूजा करने से दांपत्य जीवन में प्रेम और विश्वास मजबूत होता है। इसी कारण करवा चैथ का पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष धार्मिक और भावनात्मक महत्व रखता है।
बुध-शुक्र की युति से लक्ष्मी-नारायण राजयोग की मान्यता: ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, बुध और शुक्र की युति से लक्ष्मी-नारायण राजयोग बनने की मान्यता भी इस पर्व को खास बना रही है। ज्योतिष में बुध को बुद्धि, वाणी और व्यापार से, जबकि शुक्र को सुख-सुविधाओं, वैभव और भौतिक समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। इस युति को आर्थिक उन्नति, पारिवारिक सुख और शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। हालांकि, ज्योतिषीय योगों के फल को धार्मिक मान्यताओं के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
चंद्रदर्शन के बाद होगा व्रत का पारणा: करवा चैथ पर महिलाएं सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लेंगी। परंपरा के अनुसार, कई महिलाएं सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करती हैं और इसके बाद निर्जला व्रत शुरू करती हैं। दिनभर व्रत रखने के बाद शाम को पूजा की थाली सजाकर भगवान गणेश, माता पार्वती और करवा माता की पूजा की जाती है। महिलाएं करवा चौथ की कथा सुनती हैं और अपने पति की दीर्घायु तथा परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं। रात में चंद्रमा के उदय होने पर महिलाएं छलनी से चंद्रदर्शन करती हैं और चंद्रदेव को अर्घ्य अर्पित करती हैं। इसके बाद पति का चेहरा देखकर उनके हाथों से जल ग्रहण कर व्रत खोलती हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *