स्कोर नहीं, स्किल्स तय करेंगी सफलता, 50% अंकों वाले छात्रों के लिए भी बेहतर अवसर
इंडस्ट्री अब सिर्फ मार्कशीट नहीं, स्किल्स को दे रही महत्व;
12वीं बोर्ड परीक्षा के परिणाम आने के बाद हजारों छात्र-छात्राएं अपने भविष्य को लेकर चिंता में रहते हैं। खासतौर पर वे विद्यार्थी, जिन्हें उम्मीद से कम अंक मिले हैं या जो नीट, जेईई और क्लैट जैसी अत्यधिक प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की दौड़ में शामिल नहीं हो सके। हालांकि बदलते दौर में करियर की तस्वीर तेजी से बदल रही है। अब कंपनियां केवल एकेडमिक स्कोर के बजाय प्रैक्टिकल स्किल्स और इंडस्ट्री-रेडी क्षमता को ज्यादा महत्व दे रही हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कम या औसत अंक किसी छात्र की प्रतिभा और भविष्य की सफलता का पैमाना नहीं हैं। इसी वजह से देश की कई यूनिवर्सिटीज ने ऐसे प्रोफेशनल और स्किल-बेस्ड कोर्स शुरू किए हैं, जिनमें 10+2 में करीब 50 प्रतिशत अंक पाने वाले छात्र भी प्रवेश लेकर सफल करियर बना सकते हैं।
स्कोर नहीं, स्किल्स तय करेंगी सफलता
विशेषज्ञों का कहना है कि आज की अर्थव्यवस्था में सफलता का आधार केवल परीक्षा परिणाम नहीं, बल्कि व्यावहारिक ज्ञान, तकनीकी दक्षता और लगातार सीखने की क्षमता है। इसलिए कम अंक आने पर निराश होने के बजाय छात्रों को अपनी रुचि और क्षमता के अनुरूप स्किल-बेस्ड कोर्स चुनने चाहिए।
बदलते रोजगार बाजार में BCA, B.Sc IT, स्पेशलाइज्ड BBA और B.Des जैसे कोर्स यह साबित कर रहे हैं कि एकेडमिक स्कोर किसी भी छात्र की पेशेवर क्षमता को सीमित नहीं कर सकते। सही दिशा में मेहनत और कौशल विकास के जरिए औसत अंक पाने वाले विद्यार्थी भी सफल और उज्ज्वल करियर बना सकते हैं।
टेक्नोलॉजी सेक्टर में बढ़ रहे अवसर
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल टेक्नोलॉजी के विस्तार के साथ आईटी सेक्टर में रोजगार के नए अवसर तेजी से बढ़े हैं। ऐसे में बैचलर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन (BCA) और बीएससी इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी जैसे कोर्स छात्रों के लिए बेहतर विकल्प बनकर उभरे हैं।
इन कोर्सों की खास बात यह है कि इनमें केवल थ्योरी नहीं, बल्कि सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी और एप्लिकेशन डेवलपमेंट जैसी व्यावहारिक स्किल्स पर जोर दिया जाता है। कॉर्पोरेट कंपनियां भी अब डिग्री के नाम से ज्यादा उम्मीदवार की तकनीकी दक्षता को महत्व दे रही हैं।
डेटा एनालिटिक्स और लॉजिस्टिक्स में बढ़ी डिमांड
बिजनेस सेक्टर में भी पारंपरिक डिग्रियों की जगह स्पेशलाइज्ड कोर्स तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, डेटा एनालिटिक्स, सप्लाई चेन मैनेजमेंट और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित युवाओं की मांग लगातार बढ़ रही है।
ऐसे में डेटा एनालिटिक्स या सप्लाई चेन एवं लॉजिस्टिक्स पर आधारित बीबीए प्रोग्राम्स छात्रों के लिए आकर्षक विकल्प साबित हो सकते हैं। इन कोर्सों में छात्रों को Power BI, Tableau और ऑटोमेटेड इन्वेंट्री सिस्टम जैसे आधुनिक प्लेटफॉर्म्स पर प्रशिक्षण दिया जाता है। वर्तमान में इन क्षेत्रों में योग्य पेशेवरों की मांग उपलब्ध प्रतिभाओं से कहीं अधिक है।
UI/UX डिजाइनिंग में बन सकता है क्रिएटिव करियर
डिजिटल इकॉनमी के विस्तार के साथ क्रिएटिव टेक्नोलॉजी से जुड़े क्षेत्रों में भी रोजगार के अवसर बढ़े हैं। खासतौर पर यूजर इंटरफेस (UI) और यूजर एक्सपीरियंस (UX) डिजाइनिंग आज युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय करियर विकल्प बनकर उभरा है।
बैचलर ऑफ डिजाइन (B.Des) जैसे कोर्स छात्रों को डिजाइन थिंकिंग, यूजर रिसर्च और डिजिटल प्रोडक्ट डिजाइन की ट्रेनिंग देते हैं। इस क्षेत्र में प्रवेश के दौरान बोर्ड परीक्षा के अंकों से ज्यादा महत्व छात्र के पोर्टफोलियो, रचनात्मक सोच और समस्या समाधान क्षमता को दिया जाता है। यही कारण है कि औसत अंक पाने वाले विद्यार्थी भी इस क्षेत्र में बेहतर संभावनाएं तलाश सकते हैं।

