राजस्थान में बिल्डिंग बनाने के नए नियम, ऊंचाई पर अब कोई लिमिट नहीं, पर ध्यान रखनी होगी ये बातें
नए मॉडल बिल्डिंग बायलॉज लागू; बिना मंजूरी निर्माण पर अधिकारियों की तय होगी जवाबदेही
जयपुर, 2 जून। राजस्थान सरकार ने शहरी विकास को गति देने के लिए नए मॉडल बिल्डिंग बायलॉज लागू कर दिए हैं। भाजपा सरकार के मौजूदा कार्यकाल में दूसरी बार भवन निर्माण नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। सबसे महत्वपूर्ण फैसला यह है कि अब राज्य के शहरों में बहुमंजिला (हाईराइज) इमारतों की ऊंचाई पर लगी 70 मीटर की सीमा हटा दी गई है। हालांकि, इसके लिए आधुनिक और मजबूत फायर फाइटिंग सिस्टम की व्यवस्था अनिवार्य होगी।
अब ऊंचाई पर नहीं होगी तय सीमा
अब तक राजस्थान में अधिकतम 70 मीटर ऊंची इमारतों के निर्माण की अनुमति थी। यह सीमा वर्ष 2020 में राज्य की सबसे ऊंची अग्निशमन सीढ़ी (फायर लेडर) की क्षमता को आधार बनाकर तय की गई थी। नए नियमों के बाद निर्धारित तकनीकी मानकों और सुरक्षा प्रावधानों का पालन करने वाली इमारतों की ऊंचाई पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा।
फायर सेफ्टी सिस्टम के बिना नहीं मिलेगी छूट
सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऊंचाई सीमा हटाने का लाभ केवल उन्हीं भवनों को मिलेगा, जिनमें अत्याधुनिक अग्निशमन प्रणाली और सुरक्षा मानकों की पूर्ण व्यवस्था होगी। इसका उद्देश्य ऊंची इमारतों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
फायर एनओसी की प्रक्रिया हुई आसान
नए प्रावधानों के तहत फायर एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) की प्रक्रिया को भी अधिक व्यावहारिक बनाया गया है। पहले भवन की ऊंचाई से जुड़े कई दस्तावेज प्रस्तुत करने पड़ते थे, जिससे स्वीकृति प्रक्रिया जटिल हो जाती थी। अब नियमों को सरल बनाकर प्रक्रिया को सुगम किया गया है।
नेशनल बिल्डिंग कोड की जगह लागू होगा इंडियन स्टैंडर्ड कोड
नए मॉडल बिल्डिंग बायलॉज में तकनीकी बदलाव करते हुए नेशनल बिल्डिंग कोड (NBC) के स्थान पर इंडियन स्टैंडर्ड (IS) कोड को प्रभावी रूप से लागू किया गया है। अब भवन निर्माण स्वीकृति से पहले पंजीकृत आर्किटेक्ट और अन्य संबंधित हितधारकों को IS कोड के प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य होगा।
निर्माण स्वीकृति से लेकर ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट तक लागू होंगे नियम
नया कोड भवन निर्माण स्वीकृति, कंप्लीशन सर्टिफिकेट (पूर्णता प्रमाण पत्र) और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (अधिवास प्रमाण पत्र) जारी करने की पूरी प्रक्रिया को नियंत्रित करेगा। इससे निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है।
अवैध निर्माण पर अधिकारियों की होगी जिम्मेदारी
शहरी विकास एवं आवासन (यूडीएच) विभाग ने निगरानी व्यवस्था को भी सख्त किया है। नए नियमों के अनुसार यदि किसी क्षेत्र में बिना वैध भवन स्वीकृति के आवासीय या व्यावसायिक निर्माण होता है, तो संबंधित क्षेत्र के अधिकारी सीधे तौर पर जिम्मेदार माने जाएंगे। विभाग ने सभी स्थानीय निकायों और विकास प्राधिकरणों को नियमों की सख्ती से पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
रियल एस्टेट सेक्टर को मिलेगा बढ़ावा
सरकार के इस फैसले से जयपुर, जोधपुर और कोटा जैसे बड़े शहरों में गगनचुंबी इमारतों के निर्माण का मार्ग प्रशस्त होने की संभावना है। साथ ही, रियल एस्टेट क्षेत्र में नए निवेश और विकास गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
प्रमुख बदलाव एक नजर में
- 70 मीटर ऊंचाई की सीमा समाप्त।
- हाईराइज भवनों में आधुनिक फायर फाइटिंग सिस्टम अनिवार्य।
- फायर एनओसी प्रक्रिया को बनाया गया सरल।
- NBC के स्थान पर IS कोड लागू।
- आर्किटेक्ट्स और हितधारकों की जवाबदेही बढ़ी।
- अवैध निर्माण पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय।
- रियल एस्टेट और शहरी विकास को मिलेगा बढ़ावा।

