सोमवती अमावस्या एवं पुरुषोत्तम मास पूर्ण होने पर श्रद्धालुओं ने किया दान-पुण्य
पुरुषोत्तम मास के अंतिम दिन श्रद्धालु भक्तों ने मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना की। श्रद्धालुओं ने पुरुषोत्तम मास के अंतिम दिन की कथा के साथ सोमवती अमावस्या की भी कथा सुनी तथा कथा श्रवण के बाद भक्तों ने पंडित जी को अपनी क्षमता अनुसार कपड़े, फल व अन्य सामग्री भेंट की। पुरुषोत्तम मास के पूर्ण होने पर भक्तों ने व्रत का उद्यापन किया। जोड़े को भोजन करवा कर वस्त्र व अन्य उपहार भेट किए। श्रद्धालु भक्त रमेश जांगिड़ ने बताया कि पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) का समापन सोमवती अमावस्या पर होना अत्यंत दुर्लभ और पुण्यकारी माना जाता है। इस दिन व्रत-पूजन का उद्यापन करने से पुरुषोत्तम मास में किए गए सभी धार्मिक अनुष्ठानों और व्रतों का संपूर्ण फल प्राप्त होता है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार, जब तक उद्यापन न किया जाए तब तक व्रत और पूजा का फल अधूरा माना जाता है। जब पुरुषोत्तम मास की समाप्ति सोमवती अमावस्या के दिन होती है, तो यह योग आध्यात्मिक उन्नति और पितरों की कृपा प्राप्त करने के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। उद्यापन के दौरान 33 की संख्या में मालपुए दान करने का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि 33 वस्तुएं दान करने से 33 कोटि (प्रकार के) देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह दिन हरि (विष्णु) और हर (शिव) दोनों की आराधना के लिए उत्तम है। इस दिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ और शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से सभी कष्ट दूर होते हैं। सोमवती अमावस्या के दिन पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान, और पीपल के पेड़ की पूजा करने से पितृ दोष शांत होता है और घर में सुख-समृद्धि आती है। उद्यापन के दिन ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को भोजन कराएं और अपनी क्षमतानुसार दान-दक्षिणा दे। भगवान विष्णु की पूजा, कथा और दीपदान किया। पूजा संपन्न होने के बाद परिवार के सदस्यों के साथ प्रसाद ग्रहण किया। श्रद्धालुओं द्वारा सांयकाल मंदिरों में व घरो मे तुलसी माता के घी का दीपक जलाया व मंदिरों में विशेष आरती की गई।

