राजस्थान

जल्द लागू होगा राजस्थान एनर्जी कंजर्वेशन एंड सस्टेनेबल बिल्डिंग कोड


जयपुर, 20 जून। प्रदेश में भवन निर्माण क्षेत्र में ऊर्जा दक्षता (एनर्जी एफिशिएंसी) और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसके तहत राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम द्वारा जल्द ही राजस्थान एनर्जी कंजर्वेशन एंड सस्टेनेबल बिल्डिंग कोड लागू किया जाएगा। ऊर्जा मंत्री श्री हीरालाल नागर ने शनिवार को विद्युत भवन में निगम के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर व्यावसायिक भवनों में ऊर्जा दक्षता एवं सस्टेनेब्लिटी के न्यूनतम मानक तय करने के उद्देश्य से इस कोड तथा रूल्स-2026 के प्रारूपों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने इसे जल्द अंतिम रूप देने के निर्देश दिए।

इन भवनों पर लागू होगा नया कोड : बैठक में बताया गया कि यह कोड मुख्य रूप से उन व्यावसायिक भवनों पर लागू होगा जिनका बिल्ड अप एरिया 2000 वर्ग मीटर अथवा कनेक्टेड लोड 100 किलोवाट अथवा उससे अधिक हो। कनेक्टेड डिमांड 120 केवीए या उससे अधिक हो।

पहली बार मिलेंगे विशेष प्रोत्साहन और रियायतें : प्रदेश में पर्यावरण-अनुकूल निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए नियमों में पहली बार विशेष वित्तीय व तकनीकी लाभ प्रस्तावित किए गए हैं। कोड के प्लस मानकों का पालन करने वाले भवनों को 5 प्रतिशत तथा सुपर बिल्डिंग कोड मानकों को पूरा करने वाले भवनों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त बिल्ट एरिया रेश्यो दिए जाने का प्रावधान है।

नवीकरणीय ऊर्जा के लिए प्रावधान करना होगा जरूरी : भवनों में अनुबंधित बिजली मांग का 4 प्रतिशत अथवा उपलब्ध रूफ टॉप (छत) का 50 प्रतिशत हिस्सा अनिवार्य रूप से सौर ऊर्जा या अन्य नवीकरणीय ऊर्जा के लिए आरक्षित करना होगा। पर्यावरण अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए पृथक चार्जिंग व पार्किंग व्यवस्था का प्रावधान किया जा रहा है। स्वीकृत डिजाइन और नियमों के  अनुपालन के लिए अक्षय ऊर्जा निगम के अनुबंधित ऊर्जा ऑडिटर द्वारा समय-समय पर जांच तथा अनुमोदन किया जाएगा। नियमों का उल्लंघन रोकने के लिए रिफंडेबल सिक्योरिटी डिपोजिट और पेनल्टी के प्रावधान भी प्रस्तावित किए जा रहे हैं। समस्त प्रावधानो को सुचारू रूप से चलाने हेतु अक्षय ऊर्जा निगम द्वारा एक इंटीग्रेटेड ओनलाइन वेब-पोर्टल का  निर्माण भी किया जाएगा ।

हितधारकों से मांगे सुझाव

राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री रोहित गुप्ता ने बताया कि इस महत्वपूर्ण कोड और रूल्स-2026 को अंतिम रूप देने से पहले इसके प्रारूप पर आमजन और संबंधित हितधारकों के बहुमूल्य सुझाव आमंत्रित किए जा रहे हैं, ताकि इसे और अधिक व्यावहारिक और प्रभावी बनाया जाए। इस विषय में अभी तक 50 से अधिक सुझाव प्राप्त हुए हैं।

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