राजस्थान का अनोखा वाद्ययंत्र भपंग बजाते हैं, जानें कौन हैं गफरुद्दीन मेवाती? जिन्हे मिलेगा पद्म अवॉर्ड
25 जनवरी जयपुर । राजस्थान की माटी में ऐसे कई नायाब हीरे दिए हैं, जिन्होंने अपनी ख्याति दुनियाभर में पहुंचाई है। ऐसे ही एक कलाकार हैं, गफरुद्दीन मेवाती जोगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त लोक कलाकार और भपंग वादक गफरुद्दीन मेवाती जोगी को अब पद्मश्री से सम्मानित किया जाएगा। गफरुद्दीन मेवाती राजस्थान के विख्यात लोक कलाकार और भपंग वादक हैं। राजस्थान के डीग जिले से ताल्लुक रखने वाले मेवाती को पहले भी कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।
मेवाती का जन्म डीग ज़िले की पहाड़ी तहसील के गांव कैथवाड़ा में हुआ। मेवाती जोगी समुदाय से आने वाले गफरुद्दीन मेवाती को संगीत की विरासत में मिला। मिली जानकारी के अनुसार उनके पिता बुद्ध सिंह जोगी खुद सारंगी के उस्ताद थे। मेवाती लगभग 20 लोक वाद्यों में निपुण थे।
गफरुद्दीन का संगीत भले ही सरल प्रतीत हो, लेकिन उसमें गहराई और परंपरा की समृद्ध छाप दिखाई देती है। उल्लेखनीय है कि मेवाती जोगी समुदाय हिंदू और मुस्लिम परंपराओं का सुंदर मिश्रण है। उनके लोक गीत महाभारत, लोक रामायण, शिव, श्रीराम और श्रीकृष्ण जैसे हिंदू देवी-देवताओं की कथाओं को जीवंत करते हैं। पांडुन का कड़ा के माध्यम से मेव समुदाय अपने वंश को महाभारत के पात्रों, विशेषकर अर्जुन, से जोड़ता है। गफरुद्दीन इस कला में माहिर हैं।
मीडिया रिपोटर्स के अनुसार पांडुन का कड़ा गाने वाले वो इस दौर के अकेले गायक हैं। गफरुद्दीन मेवाती जोगी 2,500 से अधिक दोहे कंठस्थ हैं। बता दें कि गफरुद्दीन ने सात वर्ष की आयु में अपने पिता पांडुन का कड़ा सीखा। पिछले 60 वर्षों से अधिक समय से इसका मंचन कर रहे हैं। उन्होंने भारत सहित कई देशों में सांस्कृतिक उत्सवों में अपनी कला का प्रदर्शन किया है।

