राजस्थान

जिले की कमान अब टीना डाबी के हाथ, टोंक को मिली नई कलेक्टर


1 अप्रैल, टोंक। राजस्थान सरकार के ताजा प्रशासनिक फेरबदल में सबसे चर्चित नाम टीना डाबी का रहा है। यूपीएससी 2015 की टॉपर और बाड़मेर की वर्तमान कलेक्टर टीना डाबी को अब टोंक जिले का नया जिला कलेक्टर नियुक्त किया गया है। राजस्थान सरकार के प्रशासनिक फेरबदल के तहत कलेक्टर नियुक्त किया गया है। वर्ष 2016 बैच की यह अधिकारी बाड़मेर से स्थानांतरित होकर टोंक आई हैं। टीना डाबी देशभर में उस समय सुर्खियों में आई थीं जब उन्होंने यूपीएससी 2015 में प्रथम स्थान प्राप्त कर इतिहास रचा था। उन्होंने न केवल परीक्षा में टॉप किया, बल्कि अपनी प्रतिभा और मेहनत के बल पर युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनीं। इस उपलब्धि के लिए उन्हें राष्ट्रपति स्वर्ण पदक से भी सम्मानित किया गया। राजस्थान कैडर मिलने के बाद टीना डाबी ने अपने प्रशासनिक करियर की शुरुआत अजमेर में प्रशिक्षण से की। इसके पश्चात उन्होंने भीलवाड़ा, श्रीगंगानगर, जैसलमेर और बाड़मेर जैसे जिलों में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। इन जिलों में उन्होंने कई नवाचार और जनहितकारी योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू किया, जिससे आमजन को सीधा लाभ मिला। बाड़मेर में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने प्रशासनिक पारदर्शिता, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए। उनके नेतृत्व में कई योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाया गया, जिससे उनकी कार्यशैली की व्यापक सराहना हुई। उनके आगमन से जिले में प्रशासनिक कार्यों में नई ऊर्जा और गति आने की उम्मीद जताई जा रही है। वे टोंक में 68वीं जिला कलेक्टर और इस पद पर बैठने वाली 14वीं महिला अधिकारी होंगी। टीना डाबी यहाँ कल्पना अग्रवाल का स्थान लेंगी, जिनका कार्यकाल एक वर्ष से भी कम 23 जून 2025 से अब तक रहा है। कल्पना अग्रवाल को अब जयपुर में ‘निदेशक एवं पदेन विशिष्ट सचिव, जलग्रहण भू-संरक्षण ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग’ के महत्वपूर्ण पद पर भेजा गया है।
बाड़मेर में रचा इतिहास : वॉटर वुमन के रूप में मिली पहचान: बाड़मेर कलेक्टर के रूप में टीना डाबी का कार्यकाल उपलब्धियों से भरा रहा है। उन्होंने रेगिस्तानी इलाके में पानी की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए ‘कैच द रेन’ अभियान को जन-आंदोलन बना दिया। राष्ट्रपति से सम्मान उनके नेतृत्व में बाड़मेर को जल प्रबंधन के लिए देश का मॉडल जिला माना गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बाड़मेर को ‘जल संचय जन भागीदारी पुरस्कार’ से नवाजा, जिसके तहत जिले को 2 करोड़ की पुरस्कार राशि मिली।
परंपरा और तकनीक का संगम: उन्होंने पारंपरिक ‘टांका’ प्रणाली को आधुनिक तकनीक के साथ जोडक़र वर्षा जल संचयन में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई।
टोंक के लिए नई उम्मीदें: जैसलमेर और बाड़मेर जैसे चुनौतीपूर्ण जिलों में सफल कार्यकाल के बाद, अब टीना डाबी से टोंक की जनता को काफी उम्मीदें हैं। टोंक में प्रशासनिक नवाचार, महिला सशक्तिकरण और सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारना उनकी प्राथमिकता रह सकती है। टीना डाबी अपनी कार्यशैली और जनता से सीधे जुड़ाव के लिए जानी जाती हैं। बाड़मेर में जनभागीदारी आधारित विकास का जो मॉडल उन्होंने खड़ा किया, उसे अब टोंक में लागू करने की चुनौती उनके सामने होगी

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