राजस्थान

नारायण बारेठ : जनपक्षधर पत्रकारिता और व्यंग्य की धार वाले शब्दों के सिपाही

राजस्थान की पत्रकारिता जगत ने एक ऐसे व्यक्तित्व को खो दिया है, जिसने अपने पूरे जीवन को निष्पक्ष, निर्भीक और जनसरोकारों से जुड़ी पत्रकारिता के लिए समर्पित किया। वरिष्ठ पत्रकार, पूर्व सूचना आयुक्त और पत्रकार संगठन के सक्रिय मार्गदर्शक नारायण बारेठ का निधन पत्रकारिता जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। वे उन चुनिंदा पत्रकारों में थे जिन्होंने पत्रकारिता को केवल पेशा नहीं, बल्कि लोकतंत्र और समाज के प्रति एक जिम्मेदारी के रूप में निभाया।
नारायण बारेठ लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठित समाचार संस्था बीबीसी से जुड़े रहे। बीबीसी में रहते हुए उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों पर गंभीर, तथ्यपरक और संतुलित रिपोर्टिंग की। उनकी पत्रकारिता की पहचान गहराई से की गई पड़ताल और जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से सामने लाने की रही।
वे अपनी व्यंग्यात्मक लेखन शैली के लिए विशेष रूप से जाने जाते थे। उनकी लेखनी की खासियत यह थी कि वे छोटी-छोटी बातों में बड़े और गहरे अर्थ कह देते थे। उनके व्यंग्य में हल्की मुस्कान के साथ तीखी सामाजिक टिप्पणी छिपी रहती थी। पाठकों को अक्सर लगता था कि वे कम शब्दों में बहुत बड़ी बात कह जाते हैं। यही कारण था कि उनके लेखों को पढ़ना केवल जानकारी प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज की वास्तविकताओं को नए दृष्टिकोण से समझना भी होता था।
नारायण बारेठ की सोच में देश और समाज के प्रति गहरी प्रतिबद्धता दिखाई देती थी। वे अक्सर कहा करते थे कि उनकी लेखनी “इंडिया” के लिए नहीं, बल्कि “भारत” के लिए है। इस विचार में गाँव, किसान, आम नागरिक और समाज के उस वर्ग की चिंता झलकती थी जो अक्सर मुख्यधारा की चर्चा से दूर रह जाता है। उनकी पत्रकारिता का केंद्र हमेशा वही भारत रहा जो देश की आत्मा माना जाता है।
पत्रकारिता के साथ-साथ उन्होंने पत्रकारों के संगठनात्मक जीवन में भी सक्रिय भूमिका निभाई। वे जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ राजस्थान (जार) के महासचिव रहे और इस पद पर रहते हुए पत्रकारों के अधिकारों, सम्मान और सुरक्षा के लिए लगातार आवाज उठाते रहे। उनके नेतृत्व में संगठन ने पत्रकारों के मुद्दों को मजबूती से उठाया और पत्रकार समुदाय को एक मजबूत मंच मिला।
पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके अनुभव और विद्वता को देखते हुए उन्हें हरिदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के रूप में भी दायित्व निभाने का अवसर मिला। वहाँ उन्होंने पत्रकारिता के विद्यार्थियों को न केवल विषय की जानकारी दी, बल्कि पत्रकारिता के मूल्यों, नैतिकता और जनपक्षधर दृष्टि की भी शिक्षा दी। अनेक युवा पत्रकार उनके मार्गदर्शन से प्रेरित हुए।
नारायण बारेठ की निष्पक्ष छवि और सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें राजस्थान का सूचना आयुक्त भी नियुक्त किया गया। इस पद पर रहते हुए उन्होंने सूचना के अधिकार की भावना को मजबूत करने तथा प्रशासनिक पारदर्शिता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके निर्णयों और कार्यशैली में न्यायप्रियता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति गहरी प्रतिबद्धता दिखाई देती थी।
व्यक्तिगत जीवन में वे अत्यंत सरल, सौम्य और मिलनसार स्वभाव के थे। पत्रकारिता के क्षेत्र में उनका अनुभव और मार्गदर्शन अनेक युवा पत्रकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा। वे हमेशा कहा करते थे कि पत्रकारिता में सबसे बड़ी पूंजी विश्वसनीयता और नैतिकता है।
आज जब वे हमारे बीच नहीं हैं, तब उनके विचार, उनकी व्यंग्यात्मक शैली और पत्रकारिता के प्रति उनका समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि सच्ची पत्रकारिता केवल खबर लिखना नहीं, बल्कि समाज की आवाज बनना भी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *