अब 9वीं से 12वीं तक के बच्चे सीखेंगे AI, NCERT ने शुरू किया 20 घंटे का मॉड्यूल; डीपफेक पहचानने और फेक न्यूज की जांच करना भी सीखेंगे
नई दिल्ली | 26 अक्टूबर 2026 अब स्कूली बच्चे सिर्फ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करना ही नहीं, बल्कि यह भी सीखेंगे कि यह तकनीक कैसे काम करती है और इसके जवाबों पर आंख मूंदकर भरोसा क्यों नहीं करना चाहिए। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए कंप्यूटेशनल थिंकिंग (CT) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर 20 घंटे का शुरुआती मॉड्यूल तैयार किया है। इसकी घोषणा 23 अक्टूबर को की गई थी।
इस मॉड्यूल में बच्चों को रोजमर्रा की जिंदगी में AI के इस्तेमाल, मशीनों के सीखने के तरीके, AI से होने वाली गलतियों, डेटा की गोपनीयता और तकनीक के जिम्मेदार इस्तेमाल के बारे में बताया जाएगा। इसे NCERT ने IIT मद्रास और IIT जोधपुर के विशेषज्ञों के सहयोग से तैयार किया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में तार्किक सोच, रचनात्मकता और समस्याओं को हल करने की क्षमता विकसित करना है।
5 हिस्सों में समझेंगे AI की दुनिया
NCERT के इस मॉड्यूल को पांच प्रमुख हिस्सों में बांटा गया है। इसमें बच्चों को केवल तकनीकी जानकारी याद कराने के बजाय गतिविधियों और वास्तविक जीवन के उदाहरणों से समझाने पर जोर दिया गया है।
1. रोजमर्रा की जिंदगी में AI: बच्चे समझेंगे कि मोबाइल फोन, डिजिटल सेवाओं और दूसरे उपकरणों में AI का इस्तेमाल किस तरह होता है। साथ ही, सामान्य ऑटोमेशन और AI के बीच अंतर समझने का अवसर मिलेगा।
2. मशीनें कैसे सीखती हैं: विद्यार्थियों को बताया जाएगा कि मशीनें उदाहरणों और डेटा के आधार पर पैटर्न कैसे पहचानती हैं। इससे उन्हें AI की कार्यप्रणाली की बुनियादी समझ मिलेगी।
3. AI गलतियां क्यों करता है: AI कई बार आत्मविश्वास के साथ गलत जवाब भी दे सकता है। इस हिस्से में बच्चों को गलत जानकारी, भ्रामक तस्वीरों और डीपफेक जैसे मामलों को समझने तथा जानकारी की पुष्टि करने के तरीके सिखाए जाएंगे।
4. डेटा की सुरक्षा और जिम्मेदारी: विद्यार्थियों को समझाया जाएगा कि ऑनलाइन अपनी निजी जानकारी साझा करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। डेटा की गोपनीयता, सहमति, निष्पक्षता और डिजिटल सुरक्षा भी इसमें शामिल हैं।
5. AI टूल्स का सही इस्तेमाल: बच्चे AI से सवाल पूछने के लिए बेहतर निर्देश यानी प्रॉम्प्ट तैयार करना सीखेंगे। साथ ही, AI से मिले जवाबों की जांच करना और उनका उपयोग अपनी सोच को बेहतर बनाने के लिए करना भी सीखेंगे।
कंप्यूटर और इंटरनेट नहीं होने पर भी हो सकेंगी गतिविधियां
इस मॉड्यूल की खास बात यह है कि इसे केवल कंप्यूटर या इंटरनेट पर निर्भर नहीं रखा गया है। NCERT के मुताबिक, इसकी गतिविधियां डिजिटल उपकरणों के साथ या उनके बिना भी कराई जा सकती हैं।
जहां हर विद्यार्थी के पास कंप्यूटर या मोबाइल उपलब्ध नहीं है, वहां शिक्षक साझा स्क्रीन पर उदाहरण दिखा सकते हैं। इसके अलावा कागज पर अभ्यास, समूह चर्चा और अन्य गतिविधियों से भी विषय समझाया जा सकता है।
इससे उन स्कूलों को भी AI की शुरुआती शिक्षा देने में मदद मिल सकती है, जहां डिजिटल संसाधन सीमित हैं। हालांकि, स्कूलों में इसे किस तरीके से लागू किया जाएगा, यह संबंधित दिशा-निर्देशों और व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
AI का जवाब सही है या गलत, यह जांचना भी सीखेंगे
आज विद्यार्थी होमवर्क, प्रोजेक्ट और सामान्य सवालों के जवाब खोजने के लिए AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन AI से मिला हर जवाब सही हो, यह जरूरी नहीं है। कई बार यह गलत तथ्य, अधूरी जानकारी या ऐसी सामग्री दे सकता है जो सुनने में सही लगे, लेकिन वास्तविकता से मेल न खाती हो।
इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए मॉड्यूल में AI से तैयार जानकारी की आलोचनात्मक जांच पर जोर दिया गया है। विद्यार्थियों को किसी दावे के स्रोत की पड़ताल करने, दूसरी विश्वसनीय जानकारी से तुलना करने और संदेह होने पर जवाब की पुष्टि करने की आदत विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
डीपफेक के जरिए किसी व्यक्ति का चेहरा या आवाज बदलकर भ्रामक सामग्री तैयार की जा सकती है। ऐसे में डिजिटल सामग्री को बिना जांचे सही मान लेना नुकसानदेह हो सकता है। बच्चों को इन जोखिमों के प्रति जागरूक बनाना भी इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
AI मददगार होगा, लेकिन सोचने का काम विद्यार्थी करेंगे
मॉड्यूल का एक अहम उद्देश्य विद्यार्थियों को AI पर पूरी तरह निर्भर होने से बचाना है। AI का इस्तेमाल किसी विषय को समझने, विचार जुटाने या काम को बेहतर बनाने में किया जा सकता है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए अपनी समझ और विवेक का इस्तेमाल करना जरूरी है।
उदाहरण के लिए, यदि कोई विद्यार्थी किसी विज्ञान के सवाल का जवाब AI से लेता है, तो उसे उस जवाब को पाठ्यपुस्तक और अन्य विश्वसनीय स्रोतों से मिलाकर देखना चाहिए। इसी तरह, निबंध या प्रोजेक्ट तैयार करते समय AI की मदद लेने के बावजूद विषय को समझना और अपने विचार विकसित करना जरूरी है।
नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप पहल
NCERT का यह मॉड्यूल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की सोच के अनुरूप तैयार किया गया है। इसमें विद्यार्थियों को केवल किताबी जानकारी देने के बजाय व्यावहारिक समझ, समस्या समाधान और जिम्मेदार तकनीकी उपयोग के लिए तैयार करने पर जोर है।
AI का इस्तेमाल शिक्षा, स्वास्थ्य, कारोबार और दूसरे क्षेत्रों में बढ़ रहा है। ऐसे में स्कूली स्तर पर इसकी बुनियादी समझ विद्यार्थियों को बदलती तकनीक के लिए तैयार करने में मदद कर सकती है।

