टोंक रोड को मिलेगी मेट्रो की रफ्तार: सीतापुरा डिपो का भूमि पूजन, 41 किमी कॉरिडोर से बदलेगी जयपुर की ट्रैफिक तस्वीर
जयपुर, 22 जुलाई। राजधानी की सबसे व्यस्त सड़कों में शामिल टोंक रोड पर ट्रैफिक जाम से जूझ रहे लाखों लोगों के लिए बड़ी राहत की शुरुआत हो गई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शुक्रवार को सीतापुरा में जयपुर मेट्रो के दूसरे चरण के तहत बनने वाले मेट्रो डिपो का भूमि पूजन किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इससे पहले इस परियोजना का वर्चुअल शिलान्यास कर चुके हैं। करीब 41 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर के पूरा होने के बाद शहर के दक्षिणी हिस्से की कनेक्टिविटी मजबूत होगी और टोंक रोड पर यातायात का दबाव कम होने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जयपुर को आधुनिक और सुगम सार्वजनिक परिवहन प्रणाली देने के लिए प्रतिबद्ध है। मेट्रो विस्तार परियोजना से न केवल यात्रियों को तेज और सुरक्षित सफर मिलेगा, बल्कि बढ़ते ट्रैफिक और प्रदूषण पर भी प्रभावी नियंत्रण में मदद मिलेगी।
क्या बदलेगा?
- टोंक रोड पर ट्रैफिक का दबाव कम होने की उम्मीद।
- सीतापुरा, प्रतापनगर और आसपास के क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी।
- औद्योगिक क्षेत्र सीतापुरा आने-जाने वाले कर्मचारियों और विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा।
- सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा मिलने से निजी वाहनों पर निर्भरता घटेगी।
फैक्ट फाइल
- परियोजना: जयपुर मेट्रो फेज-2
- कुल प्रस्तावित लंबाई: लगभग 41 किमी
- आज का कार्यक्रम: सीतापुरा मेट्रो डिपो का भूमि पूजन
- शिलान्यास: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल माध्यम से किया
- मुख्य उद्देश्य: ट्रैफिक जाम कम करना और सार्वजनिक परिवहन को मजबूत बनाना
क्यों अहम है यह परियोजना?
टोंक रोड जयपुर की सबसे व्यस्त यातायात धमनियों में से एक है। एयरपोर्ट, प्रतापनगर, सीतापुरा औद्योगिक क्षेत्र, शैक्षणिक संस्थानों और आवासीय इलाकों को जोड़ने वाली इस सड़क पर हर दिन हजारों वाहन गुजरते हैं। ऐसे में मेट्रो विस्तार परियोजना को शहर की भविष्य की परिवहन जरूरतों के लिहाज से मील का पत्थर माना जा रहा है।
प्रमुख बातें
- सीतापुरा में मेट्रो डिपो बनने से मेट्रो संचालन और रखरखाव को आधुनिक आधार मिलेगा।
- 41 किमी का नया कॉरिडोर शहर के कई प्रमुख इलाकों को जोड़ेगा।
- परियोजना पूरी होने के बाद यात्रा का समय घटने और ट्रैफिक जाम में कमी आने की संभावना है।
- सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा मिलने से पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।

