राजस्थान

अपने सपनों का घर तलाश रहे हैं तो रहें सतर्क, जल्दबाजी करने से हो सकता है नुकसान

जयपुर, 7 जून @शेखर झा। हर इंसान की चाह होती है कि उसका भी अपना आशियाना हो, किराये के झंझट और रोज रोज की किच किच ने मुक्ति मिले, लेकिन किसी भी आम आदमी के लिए महंगाई के इस दौर में अपने लिए छत लेना कोई आसान काम नहीं है और वो भी तब जब बाजार में आए दिन कोई ना कोई धोखाधडी बिल्डरों व प्रोपर्टी कारोबारियों द्वारा की जा रही है। इसलिए जरुरी है कि कोई भी निर्णय लेने से पूर्व पूरी तरह छानबीन कर लेना। आज हम आपसे उन्ही मुददो को विस्तार से चर्चा करने जा रहे हैं जो कि आपके लिए जरुरी है।

आपकी सतर्कता ही आपका बचाव है :
जयपुर शहर के बाहरी इलाकों में इन दिनों छोटे भूखंडों में बनाए जा रहे अपार्टमेंट की बाढ सी आई हुई है हर कोई बिल्डर हैं और अपने प्रोजेक्ट को सबसे बेहतरीन और सुविधा युक्त बताते हुए अलग अलग तरह के ऑफर कस्टमर के लिए ला रहे हैं। इनके प्रचार के लिए सेल्स और कॉलिंग टीम के द्वारा आए दिन कॉल करके विजिट के लिए दबाब बनाया जाता है। जब आप विजिट कर लेते हैं तो आपको बुक करवाने या टोकन अमाउंट देना का दबाब बनाया जाता है। ऐसे में आप उस समय अपनी आवष्यकता के अनुसार कुछ टोकन अमाउंट या पेमेंट कर देते हैं। लेकिन ऐसा करने से पहले आपको रहना होगा सतर्क।

जाने रेरा और क्रेडाई सहित राजस्थान अपार्टमेंट के नियम :
जल्दीबाजी में निर्णय लेने से बचें अन्यथा आपको अपनी मेहनत की कमाई गंवाने में वक्त नहीं लगेगा। सबसे पहले आप प्रोजेक्ट के दस्तावेजों पर गौर फरमाईए, रेरा अप्रूवल, कंस्ट्रक्षन में लगाई जाने वाले उपकरणों के बिल, उनकी गारंटी, सोसायटी एक्ट, सोसाएटी में बेचे गए अन्य फ्लेट मालिकों का ब्यौरा, इत्यादि इन सभी जानकारी के बाद भी कई बार फर्जी दस्तावेज दिखाकर लोगों को जाल में फंसाया जा रहा है। रेरा की साइट पर जाकर नियम व कानून संबंधी दस्तावेजों की उचित प्रकार से अध्ययन करने के बाद ही कोई निर्णय लें। बिना किसी छानबीन के निर्णय लेना आपके लिए परेषानी का सबब बन सकती है।

कुछ जरुरी बातें :

रिकॉर्ड की करें पडताल :
प्रोजेक्ट में विजिट पर जाने से पहले बिल्डर के पिछले प्रोजेक्ट व वर्तमान प्रोजेक्ट के साथ उसके मार्केट रिकॉर्ड के बारे में जांच लें।

टोकन अमाउंट के नाम पर बचें :
टोकन अमाउंट देने से पहले लिखित तौर पर उसकी रसीद व डील कैंसिल होने पर पूरा टोकन अमाउंट रिफंड देने की पेपर पर अनुमति प्राप्त कर लें। किसी परिस्थितिवष अगर आपको निर्णय में बदलाव करना हो तो टोकन अमाउंट प्राप्त करने में परेषानी नही हो। अन्यथा आपको अपना पैसा गंवाना पड सकता है।

बिल्टअप व सुपरबिल्ट अप एरिया की नाप करवाएंः
लोग प्राय आमतौर पर इस ही बात को जानते हैं कि उनके फ्लेट की साइज इतने स्कवायर फीट है लेकिन वे ये नहीं जानते कि उसमें कितना कारपेट एरिया उन्हे उपभोग के लिए दिया गया है। जिसका वो उपभोग कर रहे हैं।

कंस्ट्रक्षन मैटेरियल पर दें ध्यान :
बिल्डर द्वारा फ्लेट निर्माण में लगाए गए ईंट, लोहा, सीमेंट, बिजली के तार, स्विच के बारे में पूरी जांच कर लें। अन्यथा जब तक छह माह तक ये नए हैं आपको आराम देंगे उसके बाद ये आपके लिए समस्या बन सकते हैं।

लिफ्ट के बारे में जरुर ले पूरी जानकारी :
किसी भी मल्टी स्टोरी बिल्डिंग का अहम हिस्सा है लिफ्ट जिसकी साइज, वारंटी व सर्विस के बार में पूडी पडताल करनी जरुरी है। क्योंकि लिफ्ट के घटिया होने से जान जाने की नौबत आ सकती है। इसलिए परिवार की सुरक्षा के लिए इस पर ध्यान दें। प्रायः घरों में सामान लाने व ले जाने के लिए लिफ्ट की आवष्यकता पडती है।

पार्किंग स्पेस व नंबर :
ये एक बडा मुदृदा है जिसमें सतर्क रहना जरुरी है कि अपार्टमेंट में कुल कितने फ्लैट हैं उनके अनुसार उतनी ही रिजर्व पार्किंग फोर व्हीलर व टू व्हीलर के लिए उपलब्ध है कि नहीं, गाडी के साइज के आधार के हिसाब से पार्किंग का स्पेस है कि अन्यथा बाद में आपकों कानूनन व आपसी लडाई में उलझना पड सकता है।

प्रधानमंत्री आवास योजना व सब्सिडी की लें पूरी जानकारी :
किसी भी ऐसे प्रोजेक्ट जिसे आवास योजना व सब्सिडी स्कीम में बताया जाता है तो पहले आप उस प्रोजेक्ट के बैंक अपू्रवल की जांच कर लें, सब्सिडी किसे मिली हैं व किस तरह व कौनसे बैंक के जरिए मिल रही है। अन्यथा बैंक लोन चुकाने में आपकी पूरी जिंदगी गुजरने वाली है। बिल्डिंग कंस्ट्रषन से जुडे एक बिल्डर से हुई बातचीत में बताया गया कि प्रोजेक्ट में फ्लेट बेचने के लिए सेल्स की टीम को टार्गेट दिए जाते हैं जिसके आधार पर प्रतिमाह की सैलरी निर्धारित की जाती है। ऐसे में ये सेल्स टीम के लोग फोन नंबरों पर मैसेज पर कॉल के माध्यम से दिनभर आपको फोन करते हैं और आपको विजिट के लिए प्रेषर डालते हैं जब पर मौक पर विजिट करेंगे तो यह कहकर टोकन अमाउंट के लिए प्रेषर डालते हैं कि लगभग सभी यूनिट बेची जा चुकी है इसलिए जल्द आप भी बुकिंग करा लीजिए।

पेमेंट प्लान व एग्रीमेंट :
पेमेंट प्लान व एग्रीमेंट में समय सीमा निर्धारित पेमेंट का माध्यम स्पष्ट रुप से होना चाहिए। एग्रीमेंट के आधार पर बैंकिंग प्रक्रिया को पूरा किया जाना चाहिए।

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