स्वास्थ्य

हीटवेव के दौरान सावधानी बरते, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में जारी किए दिशा निर्देश

जयपुर, 18 मई। लू-तापघात से से बचाव के लिये चिकित्सा विभाग ने तैयारी कर ली है और साथ ही आमजन के लिए दिशा निर्देश जारी किये है। ताकि लू तापघात से आम जनता अपना बचाव कर सके। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ शैलेन्द्र सिंह चैधरी ने बताया कि गर्मी के प्रकोप मे लू से कोई भी ग्रसित हो सकता है। परन्तु बच्चे, वृद्ध, गर्भवती महिलाएँ धूप में व दोपहर में कार्यरत श्रमिक, यात्री, खिलाड़ी व ठंडी जलवायु में रहने वाले व्यक्ति अधिक प्रभावित होते है।
लू व तापघात के लक्षण
शरीर में लवण व पानी अपर्याप्त होने पर विषम गर्म वातावरण में लू व तापघात के कई लक्षण होते है। सिर का भारीपन व सिरदर्द, अधिक प्यास, लगना व शरीर में भारीपन के साथ थकावट, जी मिचलाना, सिर चकराना व शरीर का तापमान बढना, शरीर का तापमान अत्यधिक (104 फारेनहाईट या अधिक) हो जाना व पसीना आना बंद होना, मुँह का लाल हो जाना व त्वचा का सूखा होना, अत्यधिक प्यास का लगना बेहोशी जैसी स्थिति का होना , बेहोश होना। समुचित उपचार के अभाव में मृत्यु भी संभव है। ये सभी लक्षण, लवण पानी की आवश्यकता व अनुपात विकृति के कारण होती है। मस्तिष्क का एक केन्द्र जो मानव के तापमान को सामान्य बनाये रखता है, काम करना छोड़ देता है। लाल रक्त कोशिकायें रक्त वाहिनायों में टूट जाती है व कोशिकाओं मे जो पोटेशियम लवण होता है व रक्त संचार में आ जाता है। जिसमें हृदय गति व शरीर के अन्य अवयव व अंग प्रभावित होकर लू तापघात के रोगी को मृत्यु के मुँह में धकेल देते हैं।
तापघात से बचाव
लू तापघात से प्राय: कुपोषित बच्चे, वृद्ध गर्भवती महिलाऐं, श्रमिक आदि शीघ्र प्रभावित हो सकते हैं। इन्हें प्राय: 10 बजे से सांय 6 बजे तक तेज गर्मी से बचाने हेतु छायादार ठंडे स्थान पर रखने का प्रयास किया जाना चाहिए, तेज धूप में निकलना आवश्यक हो तो ताजा भोजन करके उचित मात्रा में ठंडे जल का सेवन करके बाहर निकले, थोडे अन्तराल के पश्चात् ठंडे पानी, शीतल पेय, छाछ, ताजा फलों का रस का सेवन करते रहें, तेज धूप में बाहर निकलने पर छाते का उपयोग करें अथवा कपड़े से सिर व बदन को ढककर रखें। श्रमिकों के कार्यस्थल पर छाया एवं पानी का पूर्ण प्रबन्ध रखा जाये। लू तापधात से प्रभावित रोगी को तुरन्त छायादार ठंडे स्थान पर लिटा दें, रोगी की त्वचा को गीले कपड़े से स्पंज करते रहें तथा रोगी के कपड़ों को ढीला कर दें। रोगी होश में हो तो उसे ठंडे पेय पदार्थ देवें, रोगी को तत्काल नजदीक के चिकित्सा संस्थान में उपचार हेतु लेकर जावें। सीएमएचओ डॉ. चौधरी ने बताया कि चिकित्सा संस्थानों के एक वार्ड मे दो-चार बैड लू तापघात के रोगियों के उपचार हेतु आरक्षित रखे जाने, वार्ड का वातावरण कूलर व पंखे से ठंडा रखा जाने, मरीज तथा उनके परिजनों के लिये शुद्ध व ठंडे पेयजल की व्यवस्था रखने, संस्थान में रोगी के उपचार हेतु आपातकालीन किट में ओआरएस, ड्रीपसेट, जीएनएस/जीडी, डब्ल्यू/ रिंगरलेकटेट (आरएल) फ्लूड एवं आवश्यक दवाईयां तैयार रखने, चिकित्सक एवं नर्सिंग स्टॉफ को इस दौरान ड्यूटी के प्रति सतर्क रहने, जन साधारण को लू तापघात से बचाव के उपायों की जानकारी देने व कार्य व्यवस्था को सुचारू रूप से बनाया रखा जाने हेतु दिशा निर्देश प्रदान किये गये हैं।

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