ओरण संरक्षण पर शोध के लिए डॉ. किरन देवल सम्मानित
जयपुर, 13 फरवरी । पश्चिमी राजस्थान में पर्यावरण के समक्ष बढ़ती चुनौतियों और पारंपरिक ओरण (देव भूमि) संरक्षित क्षेत्रों के क्षरण को लेकर किए गए महत्वपूर्ण शोध के लिए डॉ. किरन देवल को सम्मानित किया गया है। डॉ. देवल, जो एस एस पारीक कॉलेज में सहायक आचार्य (राजनीति विज्ञान) रही हैं, ने वर्ष 2023 में ओरण संरक्षण, खेजड़ी वृक्षों के महत्व और वन्य जीवों की शरणस्थली के रूप में इन क्षेत्रों की भूमिका पर आधारित शोध आलेख प्रकाशित किया था। यह शोध बीकानेर से प्रकाशित यूजीसी मान्यता प्राप्त शोध पत्रिका “जागती जोत” में प्रकाशित हुआ, जो राजस्थानी भाषा में इस विषय पर पहला महत्वपूर्ण प्रकाशन माना जाता है।

अपने शोध में उन्होंने देशनोक स्थित ओरण क्षेत्र, जहाँ करणी माता की परिक्रमा का विशेष धार्मिक महात्म्य है, तथा भादरिया, जैसलमेर के विस्तृत ओरण क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए बताया कि ये स्थल सदियों से पर्यावरण संतुलन और वन्य जीव संरक्षण के केंद्र रहे हैं। वर्तमान में अतिक्रमण, वृक्षों की कटाई और मानवीय स्वार्थ के कारण ये क्षेत्र गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। इसी संदर्भ में उनके शोध को इस माह सम्मानित करते हुए पुरस्कार राशि भी प्रदान की गई। उल्लेखनीय है कि डॉ. देवल के अब तक 20 से अधिक शोध आलेख और दो पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।
