थानों और अदालतों में झूठी शिकायतों पर सजा संबंधी बोर्ड लगाने की मांग
नई दिल्ली,16 फरवरी। Supreme Court of India में एक जनहित याचिका दायर कर केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश देने की मांग की गई है कि सभी थानों, अदालतों और सार्वजनिक कार्यालयों में ‘डिस्प्ले बोर्ड’ लगाए जाएं। इन बोर्डों पर झूठी शिकायत दर्ज करने, गलत आरोप लगाने और मनगढ़ंत साक्ष्य प्रस्तुत करने पर मिलने वाली सजा का स्पष्ट उल्लेख हो।
यह याचिका अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि निर्दोष नागरिकों के खिलाफ झूठी शिकायतें संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त जीवन, स्वतंत्रता और गरिमा के अधिकार के लिए गंभीर खतरा हैं।
संवैधानिक अधिकारों और कानूनी प्रावधानों का हवाला: याचिका में उल्लेख किया गया है कि भारतीय न्याय संहिता 2023 के चौदहवें अध्याय में झूठी शिकायतों और फर्जी साक्ष्यों से संबंधित अपराधों के लिए स्पष्ट प्रावधान हैं, लेकिन इनका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो रहा है।
याचिकाकर्ता ने मांग की है कि थानों, तहसील कार्यालयों, जिला अदालतों, पंचायत भवनों और शैक्षणिक संस्थानों में सजा संबंधी प्रावधानों वाले बोर्ड लगाए जाएं। साथ ही, एफआईआर दर्ज करने से पहले शिकायतकर्ता को झूठी शिकायत के कानूनी परिणामों के बारे में अनिवार्य रूप से सूचित किया जाए और उससे एक शपथ पत्र लिया जाए कि दी गई जानकारी पूर्णतः सत्य है।
न्याय प्रणाली पर बढ़ता बोझ : याचिका में National Crime Records Bureau (एनसीआरबी) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि दर्ज मामलों और दोषसिद्धि दर के बीच भारी अंतर है, जो झूठे मुकदमों और मनगढ़ंत साक्ष्यों की समस्या की ओर संकेत करता है। इससे आपराधिक न्याय प्रणाली पर अत्यधिक बोझ पड़ रहा है।
झूठी शिकायतें और दुर्भावनापूर्ण अभियोजन न केवल व्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव डालते हैं।
विधि आयोग की रिपोर्ट का संदर्भ
याचिका में Law Commission of India की 277वीं रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि वर्तमान उपाय “अनिश्चित और अप्रभावी” हैं। इससे अदालतों का समय नष्ट होता है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, व्यापार व पेशा जारी रखने के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
याचिका में तर्क दिया गया है कि स्पष्ट चेतावनी और सजा का विवरण सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने से झूठी शिकायतों पर अंकुश लगेगा और निर्दोष नागरिकों के अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

